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Surendra kumar singh

Abstract

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Surendra kumar singh

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सबक का मौसम

सबक का मौसम

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सुबह का सबक, रौशन हो

हवा का सबक, जीवन दो

फूल का सबक, मुस्कराओ

गन्ध का सबक, विखरो

पृथ्वी का सबक, धैर्य दो


आकाश का सबको, छाया दो

परिंदों का सबक, गुनगुनावो

शबनम का सबक, शीतलता दो

धूप का सबक, पिघलो


शीत का सबक, सिमट जावो

युद्ध का सबक, जीतो

शांति का सबक, खो जाओ

शोर का सबक, जागो


रात का सबक, सपने देखो

भोर का सबक, मनुष्य बनो

प्रेम का सबक, डुबो

क्रोध का सबक, मौन रहो

कितना सुंदर मौसम है


सन्देश मिल रहे हैं

और हम सोये हुये हैं

खोये हुये हैं मौसम में

चलो उठते हैं


इस बोल के साथ कि

प्रेम में हैं

मौसम आते जाते हैं।


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