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Phool Singh

Romance


4  

Phool Singh

Romance


सौदागर

सौदागर

1 min 458 1 min 458


प्रेम के तुम सौदागर बन 

गुमराह करते क्यूँ हमदम 

नीद चैन सब उड़ा ले गए

मन मंदिर का देवता तुम बन।।


जीवन कहानी हृदय बुन 

प्रेम दीवानी तेरी मैं बन 

अर्पण कर दिया तन मन धन 

आ जाओ तुम प्रीतम बन।।


चेहरे पर मुस्कान सजा  

वर लो मुझको ओ प्रीतम 

यथार्थ बन जिंदगी का मेरी 

आ जाओ तुम दर्पण बन।।

 

राह देखती राधा बन

 आ जाओ तुम कृष्णा बन 

रास रचाए, डंडियाँ खेलें 

आ जाओ ना मेरे हमदम।।


मिटा दो मेरी हर उलझन 

छा जाओ तुम आकाश बन

 बरसा के तुम प्रेम की धारा 

विरह मिटा दो मेरी हमदम।।


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