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Phool Singh

Romance

4  

Phool Singh

Romance

सौदागर

सौदागर

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प्रेम के तुम सौदागर बन 

गुमराह करते क्यूँ हमदम 

नीद चैन सब उड़ा ले गए

मन मंदिर का देवता तुम बन।।


जीवन कहानी हृदय बुन 

प्रेम दीवानी तेरी मैं बन 

अर्पण कर दिया तन मन धन 

आ जाओ तुम प्रीतम बन।।


चेहरे पर मुस्कान सजा  

वर लो मुझको ओ प्रीतम 

यथार्थ बन जिंदगी का मेरी 

आ जाओ तुम दर्पण बन।।

 

राह देखती राधा बन

 आ जाओ तुम कृष्णा बन 

रास रचाए, डंडियाँ खेलें 

आ जाओ ना मेरे हमदम।।


मिटा दो मेरी हर उलझन 

छा जाओ तुम आकाश बन

 बरसा के तुम प्रेम की धारा 

विरह मिटा दो मेरी हमदम।।


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