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Vandana Srivastava

Inspirational

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Vandana Srivastava

Inspirational

सैनिक

सैनिक

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तड़ तड़ कर चली गोलियां,

धड़ धड़ कर शव गिर रहे,

रे अधमी मेरी मां को छूने के,

देख सारे प्रयास निष्फल रहे,

अट्टहास करता हुआ सैनिक,

शिव का रौद्र स्वरूप दिखे,

आंखों से दिखती ज्वाला,

हलाहल विष को पीने वाला,

ताप शीत की फिकर ना उसको,

मुश्किलें विचलित कर ना पाईं उसको,

डटा हुआ है सीमा पर बन प्रहरी,

चोट दे जाये दुश्मन को वो गहरी,

मां के श्वेत आंचल का मान,

आंच ना आने दूंगा चाहे जाये जान,

मन में यह विश्वास सदृढ़ है,

कदम उठे जो वापस लेना मुश्किल है,

लहर लहर लहराये तिरंगा ऊंचे गगन में,

आन बान शान कुर्बान मेरे वतन पे,

कोई दुष्ट साहस ना करे अशुद्ध कदम धरने की,

जान से हाथ धोना पड़ेगा सुन कोरी नहीं यह धमकी,

चुन सकता था मैं भी आराम का जीवन अपना,

लेकिन मां से प्यार बड़ा है क्या करूं मैं इसके,

देख नहीं सकता गंदी नज़रों को मां पर अपने उठते,

कैसे सह लूंगा मैं मां का आंचल मैला होते,

छुप छुप कर जो वार कर रहे कैसे दुष्ट पापी,

घर में छुपे हुये जो भेदी छद्म स्वरूप के साथी,

डर मुझे नहीं लगता है जो सामने आ वार करें,

डरता हूं मैं उनसे जो दीमक की तरह खोखला करें,

साहस और वीरता का पर्याय दिखता सीमा पर,

सीने पर खाते हैं गोलियां वार नहीं करते छुप कर,

सो रहे अपने घरों में सुख चैन की रातें,

किसी मां का लाल जाग कर रोकता है आघातें,

जय हिंद जय देश के जवान देश सदा आभारी है,

नतमस्तक हैं भारतवासी सैनिक जिनके प्रहरी हैं..!!

जय हिंद जय भारत....

सम्मान है जिनका हक..

कुछ नहीं चाहते हैं हमसे..

जान दे देते हैं हंसते हंसते...

आओ हम उनका इतना तो सम्मान करें..

उनके बाद उनके परिवार का ध्यान करें..

वीरवधू की गाथा ना मिलती है किताबों में..

जिस मां का लाल शहीद हुआ उसे नींद नहीं आती रातों में..

यह जिम्मेदारी हम सब भारतवासी निभायेंगे,

सम्मान सहित जीने का हक हम उन परिवारों को दिलायेंगे..

दृढ़निश्चय कर प्रण है ये,

सम्मान उनका हक है ये...!!


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