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Pratibha Bhatt

Inspirational

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Pratibha Bhatt

Inspirational

सैनिक की आत्मा

सैनिक की आत्मा

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सरहद पर अपना शरीर छोड़ आया हूं,

जेब के बटुएं में परिवार की वो तस्वीर,

दिल में पूरा हिंदुस्तान भर के लाया हूं।


.आत्मा मेरी कल्पित होती, जब देखता हूं,

रोते बिलखते चेहरे और सूना मन का दर्पण,

शूरवीर की वीरांगना मां हो तुम,

दुखी जीवन का आज करो तर्पण।


माटी मेरी जो सनी लहू से लाल,

व्योम केसरिया रक्त रंग व्याप्त हुआ,

गर्वित मेरी सांसे और तन- मन,

जन्म लेना इस माटी में धन्य हुआ। 


हां, मुश्किलें झेली मैंने अपार,

सूखा, ठंड, गर्मी बर्फीली चोटियां की किनार,

जाम होता शरीर और सीने पर खाता गोलियां,

शहीद हुआ बेटा मैं तुम्हारी कोख से जन्म लिया,

जन्म मरण का खेल है,

जीवन मूल्य मैने जान लिया।


देह सुकून से अब सो रही है 

मातृभूमि की रक्षा करने हेतु,

जीवन अपना बलिदान किया।


आंसू पोंछ कर उठो मां

मरा नहीं मैं,कैसे तुमने मान लिया।

वीर जवान की अर्धांगिनी हो तुम,

कठोर मन दृढ़ विश्वास का प्रतीक,

मेरे बाद संभालना है, तुमको सब कुछ,

लेकर हर परिस्थिति से सीख।


बच्चों को खूब पढ़ाना सैनिक,डॉक्टर, इंजीनियर, 

जो भी बने,देश प्रेम पहले सिखाना,

रोशन करना मेरा नाम व्यर्थ ना हो मेरे प्राण,

एक वादा मुझसे आज करना,

 पराक्रम का प्रतीक बनकर 

 मेरा बलिदान अमर कर देना।


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