Shailaja Bhattad
Classics
अकेलेपन के
इतने
आदी भी
न हो जाओ कि,
किसी का साथ भी
साथ ना लगे।
शिव-शिव
सत्संग
श्री राम
सबकी होली
जयश्री राम
ओम नमः शिवाय
श्री राम ध्या...
हे प्रभु
जय जय श्रीराम...
उसे सहना सीखो संतोष को धारण करके संतुष्ट मगन मन रहना सीखो। उसे सहना सीखो संतोष को धारण करके संतुष्ट मगन मन रहना सीखो।
यहीं सुकून मन जैसे सहारे लिए हो लगता है हमें तुम हमारे लिए हो। यहीं सुकून मन जैसे सहारे लिए हो लगता है हमें तुम हमारे लिए हो।
हार तो सबक सिखाती ही है कभी जीत भी सीख दे जाती है। हार तो सबक सिखाती ही है कभी जीत भी सीख दे जाती है।
एक हो गये रूह ने तुझको यूं स्वीकार किया तेरे बिन इक पल भी जीने से दिल ने इंकार किया। एक हो गये रूह ने तुझको यूं स्वीकार किया तेरे बिन इक पल भी जीने से दिल ने इंक...
हम हौसले बुलंद रखें, हर हाल हरदम। खुशियां मिलें चाहे मिलें, कोटि-कोटि गम।। हम हौसले बुलंद रखें, हर हाल हरदम। खुशियां मिलें चाहे मिलें, कोटि-कोटि गम।।
बदलेगा मंज़र नई सुबह दमकेगी मन में ये विश्वास जगाता रहा। बदलेगा मंज़र नई सुबह दमकेगी मन में ये विश्वास जगाता रहा।
सामर्थ्य से परिपूर्ण हूँ..! संघर्ष से दृढ़ निश्चय हूँ..! सामर्थ्य से परिपूर्ण हूँ..! संघर्ष से दृढ़ निश्चय हूँ..!
राम सिया के प्रेम का सेतु राम सेतु कहलाता है! राम सिया के प्रेम का सेतु राम सेतु कहलाता है!
आता नहीं है दिल को तारीफ किसी की भी कर दे लाख चेहरे देखे हैं मगर उनकी तरह बेहतरीन नहीं। आता नहीं है दिल को तारीफ किसी की भी कर दे लाख चेहरे देखे हैं मगर उनकी तरह बे...
हर हाथ फिर, शक्ति स्तम्भ होगा। तब हर वृद्ध, वृद्ध नही बुद्ध होगा। हर हाथ फिर, शक्ति स्तम्भ होगा। तब हर वृद्ध, वृद्ध नही बुद्ध होगा।
हर मुश्किल के हैं सुझाव बहुत, आत्मीय स्पर्श बस मिलता नहीं। हर मुश्किल के हैं सुझाव बहुत, आत्मीय स्पर्श बस मिलता नहीं।
स्वांस प्राण आधार माँ जग जननी, सकल जगत आधार माँ। स्वांस प्राण आधार माँ जग जननी, सकल जगत आधार माँ।
पेड़ से टूटकर पत्ते वजूद खो देते हैं अपनों से बिछडकर लोग रो देते हैं। पेड़ से टूटकर पत्ते वजूद खो देते हैं अपनों से बिछडकर लोग रो देते हैं।
कान्हा तेरी कालिंदी अब पल पल कितना सिसकती है। कान्हा तेरी कालिंदी अब पल पल कितना सिसकती है।
शेरोवाली की करो जय - जयकार । माता रानी करे सबका बेड़ा पार ।। शेरोवाली की करो जय - जयकार । माता रानी करे सबका बेड़ा पार ।।
इसी आस में जी रही हूं हर पल मैं जल जल कर पूर्ण करोगे तपस्या मेरी मेरे प्रियतम मेरे बन इसी आस में जी रही हूं हर पल मैं जल जल कर पूर्ण करोगे तपस्या मेरी मेरे प्रियत...
तेरी गोद में सर रखकर सिसक - सिसक कर रोना चाहती हूँ माँ। तेरी गोद में सर रखकर सिसक - सिसक कर रोना चाहती हूँ माँ।
लेकिन तुमने तो अधूरा ही छोड़ दिया था मुझे। आधा तुममे थी आधी ही रह गई थी अपने संग। लेकिन तुमने तो अधूरा ही छोड़ दिया था मुझे। आधा तुममे थी आधी ही रह गई थी...
व्यथा से प्रवाहित शरीर अब अड़चनों का बोझ लगता हैं। व्यथा से प्रवाहित शरीर अब अड़चनों का बोझ लगता हैं।
जाने की ज़िद ये तेरी मार ही ड़ालेगी, बरसाती मौसम में तन मेरा सुलगता है। जाने की ज़िद ये तेरी मार ही ड़ालेगी, बरसाती मौसम में तन मेरा सुलगता है।