सांस्कृतिक एकता
सांस्कृतिक एकता
सांस्कृतिक एकता भारत की
संस्कृत भाषा से साकार हुई,
जिसके विकास में उत्तर और
दक्षिण दोनों का योगदान है।
पुराणों का प्रतिनिधित्व
हमारी प्राचीन संस्कृत भाषा करती
वैदिक वाड्.मय भी संस्कृत में है
जो ज्ञान विज्ञान की भाषा है।
हमारे विचार और सिद्धांत तो
उदार और सहिंष्णु हैं,
पर सामाजिक संस्कार
अनुदार और संकीर्ण हैं।
नये युग के परिवेश में
हमें भी परिवर्तन लाना होगा
अत्यन्त गौरवमयी भाषा में
अपने संस्कारों को परखना होगा।
विचारों के क्षेत्र में आगे बढ़ें
ऊँची से ऊँची चोटियों पर कदम रखें
अनन्त ज्ञानराशि के भण्डार से
उज्ज्वल रत्नों को लेकर सुखी बनें।
आज हम आणविक युग के
दरवाज़े पर आन खड़े हुए हैं,
नये ज्ञान से भी अपने के समृद्ध करें
और अपना चहुमुखी विकास करें।
