रुक मत राही
रुक मत राही
रुक मत राही तुमको तो चलना है
बस आगे ही आगे बढ़ते रहना है
जो चलता है वो नही थकता है
रुकने पर जीवन रुकता है।
है शिथिल जो उनमें संचरित करना है
समाज प्रगति का प्रतीक बनना है
इस घोर तप में नही गलना है
रुक मत राही तुमको तो चलना है।
कठिनाई ,बाधाएं तो आएगी
जोश,रोष से वो चली जाएगी
इन कांटो को पग से दलना है
रुक मत राही तुमको तो चलना है।
उचित अवसर को तुम खोना नही
लक्ष्य भेदे बिना अब रुकना नहीं
मौका खोकर तो हाथ नही मलना है
रुक मत राही तो तुमको चलना है।
