STORYMIRROR

Sangeeta GodboleJoshi

Drama

3  

Sangeeta GodboleJoshi

Drama

ऋतुराज

ऋतुराज

1 min
461

धरती जब कुछ मुरझायी सी 

पंछी भूले गान 

पौधों के अधरों पर लाता

बसंत ऋतु मुस्कान


मंद समीरन दिल को भाये 

पंचम स्वरमें कोयल गाये

ऋतुचक्र का सबसे है ये

प्यारा सा मेहमान


पौधों के अधरों पर लाता

वसंत ऋतु मुस्कान 


हरियाली की चुनरी ओढे

धरती रंगों से होली खेले

जीवन का आनंदकंद है

ऐसा सौख्यनिधान


पौधों के अधरों पर लाता

वसंत ऋतु मुस्कान


ऋतुओं की ये ऋतु मस्तानी

हँसती सूरज किरण सुहानी

स्वर्ग लोक के कुसुमाकर से 

खुश है हर इन्सान


पौधों के अधरों पर लाता

वसंत ऋतु मुस्कान।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama