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Tanha Shayar Hu Yash

Abstract

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Tanha Shayar Hu Yash

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रोज याद क्या करना

रोज याद क्या करना

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ऐसी यादों का क्या तनहाई में क्या करना 

जो हर वक्त गम से हमारी शाम भरती हो । 

अजी जो दे नहीं पाती हमें सुख के दो पल 

ऐसे पलों के हाथ रो रोकर क्या गुजरना । 


तुम जिदंगी की तस्वीर दिखाने वाले क्यों ?

ऐसे उदास मौत की तस्वीरों में घिरे बैठे हो । 

बहुत से किये होगें खुशी के जश्न भी आपने 

बस इन आखिरी पलों रोज याद क्या करना। 


तनहा जो बड़े होते है वो बड़कपन दिखाते हैं

खुद भी खिलते है , हर तरफ फूल खिलाते हैं

कर्म करते है , गम को निचोड़ कर पी जाते हैं

सबको सीख देते है कड़वापन याद क्या रखना । 



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