रोज याद क्या करना
रोज याद क्या करना
ऐसी यादों का क्या तनहाई में क्या करना
जो हर वक्त गम से हमारी शाम भरती हो ।
अजी जो दे नहीं पाती हमें सुख के दो पल
ऐसे पलों के हाथ रो रोकर क्या गुजरना ।
तुम जिदंगी की तस्वीर दिखाने वाले क्यों ?
ऐसे उदास मौत की तस्वीरों में घिरे बैठे हो ।
बहुत से किये होगें खुशी के जश्न भी आपने
बस इन आखिरी पलों रोज याद क्या करना।
तनहा जो बड़े होते है वो बड़कपन दिखाते हैं
खुद भी खिलते है , हर तरफ फूल खिलाते हैं
कर्म करते है , गम को निचोड़ कर पी जाते हैं
सबको सीख देते है कड़वापन याद क्या रखना ।
