Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Shailaja Bhattad

Abstract


4.5  

Shailaja Bhattad

Abstract


रंगीली ऋतु

रंगीली ऋतु

1 min 161 1 min 161

बूंदें सावन की रही पुकार

घटा घनघोर रिमझिम फुहार। 

नाचे मोर झूम-झूम

रंगीली ऋतु में त्योहारों की मची है धूम ।

धुली धुली धवली चांदनी

तारों की झिलमिल से सजी मेरी बांधनी। 

बागों में इठलाते झूले

राग मल्हार में ता ता थैय्या करते ,

मौसम ने ली है क्या खूब करवट। 

इंद्रधनुषी चादर ओढ़े बज रही है सरगम।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Shailaja Bhattad

Similar hindi poem from Abstract