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Neeraj pal

Abstract

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Neeraj pal

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रंग दे सांवरिया।

रंग दे सांवरिया।

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रंग दे सांवरिया, मोहे, रंग दे सांवरिया।


ऐसी रंगो, जो रंग नाहीं छूटे, 

हो जाऊँ मैं तेरी बावरिया। रंग दे.


 होली खेलत मन नाहीं ऊबत,

 तेरे ही रंग में रंग जाए चुनरिया। रंग दे.


मोहे ना भाए तुम बिन यह होली, 

चाहे बीत जाए मोरी सारी उमरिया। रंग दे.….


 प्रेम का रंग मोहे ऐसे चढ़त है,

 बन बैठूँ मैं तेरी जोगनिया। रंग दे..


तुम ही मेरे हो रंग रजवा,

अब तो ले लो मेरी खबरिया। रंग दे..


 बृज की होली भी फीकी लागत,

 सुनूँ ना जब तक तुम्हारी बसुरिया। रंग दे 


मेरे तो तुम ही हो कन्हैया,

रास लीला के तुम हो रचैया। रंग दे..


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