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Anjana Singh (Anju)

Abstract

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Anjana Singh (Anju)

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" रंग बिरंगी होली "

" रंग बिरंगी होली "

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फागुन रंग उतर आये हैं

लाल चुनर ओढ़कर

टेसू सुंगध बिखराये हैं

चहुंओर छा रहा उल्लास

करतें हैं लोग हासपरिहास


गली -गली बिखरें रंग गुलाल

घर-घर में महके पकवानों के थाल

रंग-गुलाल उड़ाये है मतवालों की टोली

चारों ओर जैसें सज रही रंगोली


सब करें हैं यूं ऐसी हँसी ठिठोली

जैसें अंगों में थिरकन भर रही है होली

लाज-लजीली पी के संग मैं खेलू होली

याद आती पीहर की सब सखी सहेली

मन को रंग लो रंग रंगीली


झूम रही मस्तों की टोली

फागून की ऋतु है अलबेली

तभी तों सबकों भावे होली

एक-दूजें पर सबनें रंग है साधा

श्याम रंग रंग गई है राधा


कहीं फाग की तान छिड़ रही

कहीं बज रहे हैं ढोल

हँसी खुशी सब खेल रहे

इस प्यार का ना कोई मोल


आओं सखी तुम्हें भिगों दे 

होली के मतवाले रंगों में

भेद ना कोई रह जाए

प्यार और उमगों में


एक-दूसरें के रंगों में 

सब रंग जातें हैं होली में

भेदभाव दुश्मनी छोड़ 

सब मिल जातें हैं होली में

टोली फगुआ सुना रही है


आपसी रंजिश मिटा रही है

मन में रहे ना कोई मलाल

मल दो प्यार से रंग गुलाल

प्यार के रंग में रंग दों सबको


रह ना जाए कोई बेरंग

प्यार रंग पर सरोबार

फागुन का सतरंगी रंग

बहुत कुछ कह जाता है


प्यार मिलाप से भरकर

तो जीवन भी संवर जाता है।


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