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Dinesh Dubey

Abstract

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Dinesh Dubey

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रिश्ते बनाओ

रिश्ते बनाओ

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मिलकर रहो शक्कर की तरह,

जो हमेशा मिठास देता हैं,

रिश्ते बनाओ तो नमक की तरह,

जो घुलकर स्वाद बढ़ाता है।


समाज में रहो घी की तरह,

जो सबको ताकत देता है,

दुनिया में रहो जल की तरह,

जो सबके काम आता है।


दिल में बसो हल्दी की तरह,

जो लग जाए तो छूटता नही,

प्यार करो तो हवा की तरह,

जिसके बिना कोई जीता नहीं।


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