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Sandeep Gupta

Inspirational

3  

Sandeep Gupta

Inspirational

रेलगाड़ी

रेलगाड़ी

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रेलगाड़ी के सफ़र में,

खटर-पटर बहुत है।

पर छुक-छुक छक-छक, 

छक-छक छुक-छुक के बीच,

तमाशा भी भरपूर है,

मनोरंजन भी भरपूर है ।


साथ कुछ घंटों का,

किसी को लगता लम्बा,

किसी को लगता छोटा।

साथ कुछ घंटों का,

किसी को ख़ूब भाता,

किसी को बहुत खटकता।


अधसोए, अधजगे,

कुछ बैठे, कुछ पसरे,

कुछ पैर फैलाए मस्त,

कुम्भकरण से लेटे।

कुछ सिकुड़े-सिमटे कोने में,

राज पाट छोड़, बैठे हों जैसे।


कोई मितभाषी,

तो कोई बड़बोला,

मौन धरे है बैठा कोई।

कोई मस्त मिज़ाजी,

कोई नकचड सनकी पाजी।

सीट को समझ राजगद्दी,

जमा है बैठा कोई,

पुट्ठे भर जगह पाने की,

फ़िराक़ में है खड़ा कोई।


कोई पास आ रहा किसी के,

कोई दूर जा रहा किसी से,

मिलने की आतुरता,

बिछड़ने का ग़म,

कोई अनमना-गुमसुम बैठा,

ज़बरन बिठा दिया हो जैसे ।


चलती, रूकती, रेलगाड़ी,

कोई चड़ता, कोई उतरता,

कुछ शहर पहचाने से,

कुछ अनजाने से आते,

कुछ याद दिलाते वो दिन,

कुछ आजा-आजा पास बुलाते ।


बच्चों के तो भाग खुले हैं,

खिड़कियों पर क़ब्ज़ा जमाते,

रेलगाड़ी को खेल गाड़ी बनाते,

धमा-चौकड़ी मचा मचा के,

किसी को लुभाते,

किसी को खीजाते ।


चना, मूँगफली

मठरी, भुजिया, 

सब बँट जाता,

सब खप जाता।

पानी, कोल्ड ड्रिंक, ठंडा-ठंडा,

चाई-चाई कोई कहता जाता।

खुलता जब डिब्बा खाने का,

सबका मन ललचा जाता,

आचार, मुरब्बा, चटनी, भाजी,

पूरी-पराँठा, इडली-साम्भर, 

सारा डिब्बा महक जाता।

 

इतना कुछ घटित हो जाता,

चंद घंटों के सफ़र में,

रिश्तों और ज़िंदगी को,

मिलती एक नयी चमक है,

कुछ जुड़ जाता, कुछ छूटा जाता,

रेलगाड़ी के सफ़र में।

रेलगाड़ी के सफ़र में,

खटर-पटर ज़रूर है,

पर तमाशा और,

मनोरंजन भी भरपूर है ।


छुक-छुक छुक-छुक

चलती गाड़ी,

छुक-छुक छुक-छुक

रेलगाड़ी,

चलते में ना उतरें, 

चलते में ना चढ़ें,

सजग रहें,

सुरक्षित सफ़र करें।

महिलाओं, बच्चों,

वृद्धजन,दिव्यांग को,

सीट दें, सम्मान दें।

मुफ़्त का ये मनोरंजन,

और जीवन के अनोखे

अनुभव के लिए,

साल में एक बार रेलगाड़ी में

सफ़र अवश्य करें ।



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