STORYMIRROR

Nitu Arora

Tragedy

2  

Nitu Arora

Tragedy

रद्दी पत्र

रद्दी पत्र

1 min
181

खफा थे हमसे तो किसी

और का हाथ थाम लेते

कम से कम हम तुम्हें देख

तो लेते..


हमसे हाथ छुड़ा कर तुम

दुनिया से चले गए

प्यार से भरे ये खत हमारे

पास ही धरे रह गए..


जब तुम्हारा पता था

तब हिम्मत ना जुटा पाए

खत भेजने के लिए..

आज जब कोई पता नहीं तुम्हारा

तो दिल तड़प रहा है

तुम्हें ये सब पढ़ाने के लिए..


सांसों के बिना जैसे इंसान

का कोई वजूद नहीं

पते के बिना इस खत के

कोई मायने नहीं ..



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy