STORYMIRROR

Bhawna Vishal

Drama

3  

Bhawna Vishal

Drama

रात्रि बड़ी सुखदायी थी

रात्रि बड़ी सुखदायी थी

1 min
252

प्राणाग्नि सी जलती रही,

सुख स्वप्न बन चलती रही,

नव-दीप लेकर आई थी,

रात्रि बडी़ सुखदायी थी।


तम जिसका दीप्तिमान था,

निष्प्राण वो प्राणवान था,

आशाएं जगमगाई थी,

रात्रि बड़ी सुखदायी थी।


गंतव्य पथ पर हम चले,

सौ-सौ कमल दल फिर खिले,

वीणा मधुर झनकाई थी,

रात्रि बडी़ सुखदायी थी।


उल्लास हिय में है हिलोरता,

भावों की परतें टटोलता,

वो उमंग की परछाई थी,

रात्रि बड़ी सुखदायी थी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama