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Madan lal Rana

Inspirational

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Madan lal Rana

Inspirational

रास्ते और मंजिल

रास्ते और मंजिल

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निकले थे अकेले

जिन अंजानी राहों पर

रास्ते से रास्ते निकले

हरेक मोड़ पर।

आगे बढ़ते गए

धुंध छांटता गया

उलझनें सुलझती गयीं

गम मिटता गया।

कुछ हमसफ़र भी मिले 

जो साथ-साथ चले

कुछ अपनों सा

कुछ अपनों से बढ़कर निकले।

जिन्हें साथ चलना था

वो साथ चलते रहे

हमारे चलते-चलते

और साथ मिलते रहे।

कदम बढ़ते रहे

कारवां बनता रहा

रास्ते की हर मुश्किल

आसान होता रहा।

थक जाऊं मंजूर नहीं

रुक जाऊं मुमकिन नहीं

हौसले और जब साथ हैं अपने

मंजिल अब दूर नहीं।



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