पहलू
पहलू
होते हैं हर सिक्के के दो पहलू
एक ऊपर जो हमें दिखता है,
दूसरा नीचे जो छिपा रहता है।
हम वही देखते हैं जो ऊपर दिखता है,
नीचे देखने के लिए सिक्का पलटना पड़ता है।
सिक्के के समान है जिंदगी के हर मोड़ पर
किसी भी वाक्या में हमेशा दो पहलू होते हैं।
पहला जो सामने रहता है वही लोग मान लेते हैं।
किंतु कभी-कभी जो दिखता है वह सच नहीं होता है।
ऐसे वक्त में जरूरत होती है दूसरे पहलू को देखने की।
आँखों देखी पर ही विश्वास कर लेना सही नहीं होता।
कभी-कभी सच कुछ और होता है दिखता कुछ और है।
किसी भी बात के परिणाम तक पहुंचने से पहले
हमें हर पहलू को अलट पलट कर देख लेना चाहिए।
कभी किसी निर्दोष को सजा न मिले,
कोशिश यह तभी कामयाब होगी जब
हम उसके हर बात को सुनें और मंथन करें।
