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GENIUS BOY RAM

Inspirational

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GENIUS BOY RAM

Inspirational

राम बहुत याद आते हैं

राम बहुत याद आते हैं

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भीड़ में हर चेहरा अपनों-सा लगता है,

पर अपनों में भी अपनापन कहाँ दिखता है।

दौलत की दौड़ में रिश्ते पीछे छूट जाते हैं,

ऐसे समय में राम बहुत याद आते हैं।

राम बहुत याद आते हैं,

दिल को राह दिखाते हैं,

जब-जब मानव भटक जाता है,

राम बहुत याद आते हैं।

जब भाई ही भाई के बीच दीवार बन जाए,

माता-पिता अपने ही घर में वनवास बिताएँ।

स्वार्थ के आगे प्रेम कहीं हार जाए,

मानवता जंजीरों में जकड़ी रह जाए।

राम बहुत याद आते हैं,

दिल को राह दिखाते हैं,

जब-जब मानव भटक जाता है,

राम बहुत याद आते हैं।

जब सत्ता का ध्रुवीकरण चारों ओर छा जाए,

वादों से अधिक आरोपों की बौछार हो जाए।

जनहित कहीं शोर में दबकर रह जाए,

राम बिना रामराज्य की बातें की जाए

राम बहुत याद आते हैं,

दिल को राह दिखाते हैं,

जब-जब मानव भटक जाता है,

राम बहुत याद आते हैं।

जब सत्य से अधिक माला फेरी जाए,

शबरी के साथ आज भी भेदभाव किया जाए।

वनवासियों के अधिकार दबाए जाएँ,

भगवा पहनकर सीता-हरण किए जाएँ।

राम कोई आतिश का नारा नहीं,

माला, तिलक या चादर का गुलाम नहीं।

राम सत्य हैं, करुणा हैं, सेतु हैं,

मनुष्य से मानवता तक की यात्रा हैं।

राम मर्यादा हैं, त्याग हैं, सम्मान हैं,

निर्बल की आशा और धर्म का विधान हैं।

राम मंदिरों में ही नहीं, व्यवहार में बसते हैं,

जो सबको अपना लें, राम वहीं बसते हैं।

राम बहुत याद आते हैं,

दिल को राह दिखाते हैं,

जब-जब मानव भटक जाता है,

राम बहुत याद आते हैं।

          — राम सुमरन



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