ईश्वर की खोज या मनुष्य की?
ईश्वर की खोज या मनुष्य की?
मेरा होना ईश्वर के अस्तित्व पर क्यों टिका है?
मैं न होता—
तो क्या होता?
न यह प्रश्न जन्म लेता,
न उत्तरों का यह अथाह जंगल।
तुम मुझसे पूछते हो—
"क्या ईश्वर है?"
पर कभी
उससे भी पूछा है?
वह है भी,
या सदियों से
हमारे भय का सबसे पुराना नाम भर है?
और यदि है—
तो किसकी कैद में है?
स्वतंत्र तो वह भी नहीं दिखता।
हर प्रार्थना
उसे एक नया आदेश देती है।
हर इच्छा
उसे नया चेहरा पहनाती है।
हर धर्म
उसे अपने पक्ष में खड़ा कर देता है।
तो फिर बताओ—
ईश्वर स्वतंत्र है,
या मनुष्य की इच्छाओं का
सबसे मौन बंदी?
उसके मौन का अर्थ
इतनी आसानी से मत लिखो।
हर त्रासदी के बाद
यह कह देना—
"सब उसकी मर्ज़ी से हुआ।"
आस्था नहीं,
कई बार
यह मनुष्य के अपराधों का
सबसे सुरक्षित आश्रय होता है।
किन्तु तुम्हारे इस प्रश्न ने
मुझे भीतर तक व्यथित कर दिया—
ईश्वर की खोज क्यों?
यदि सब कुछ माया है,
तो कौन ईश्वर?
यदि सब क्षणभंगुर है,
तो किस सत्य की तलाश?
यदि उत्तर पहले से लिखे हैं,
तो प्रश्न जन्म ही क्यों लेते हैं?
तुमने
धरती को बाँटा,
मनुष्य को बाँटा,
रक्त बहाया,
सभ्यताएँ जलाईं,
और अंत में
दोष उस पर डाल दिया—
जो शायद
है भी नहीं।
और यदि है—
तो किस अवस्था में होगा?
क्या वह
हमारी कल्पनाओं की जेल में कैद है?
या हमारे कर्मों के मलबे के नीचे
दबा हुआ कोई मौन?
या फिर
वह हर बार मर जाता है,
जब मनुष्य
उसके नाम पर
मनुष्य का वध करता है?
मेरे होने ने
सवालों का एक जाल बुना।
मैं
हर उत्तर के साथ
थोड़ा और उलझता गया।
खुद को रचता गया।
खुद को तोड़ता गया।
खुद को जोड़ता गया।
और फिर भी—
फँसता गया।
भीड़ से अलग
जब अपनी मंज़िल की पहली आहट सुनी,
तब जाना—
सबसे कठिन यात्रा
भीड़ से बाहर नहीं,
अपने भीतर होती है।
इसलिए—
तुम भी
खुद को रचो।
पाप धोकर
फिर पाप करने का
यह धार्मिक अभिनय छोड़ दो।
ईश्वर के उस भय को
अपने भीतर से निकाल फेंको,
जो तुम्हारा होकर भी
कभी तुम्हारा था ही नहीं।
अपने ही बोए हुए
पापों के बीज
जड़ से उखाड़ फेंको।
क्योंकि
मनुष्य का विनाश
किसी ईश्वर के क्रोध से नहीं,
उसकी अपनी तृष्णा,
उसके अपने कर्म,
उसके अपने पाखंड,
और उसके अपने भ्रम से जन्म लेता है।
और तब...
शायद तुम फिर पूछोगे—
ईश्वर कहाँ था?
लेकिन उस दिन
प्रश्न बदल चुका होगा।
तुम्हें पूछना होगा—
मनुष्य कहाँ था?
शायद...
यहीं से
ईश्वर की नहीं,
मनुष्य होने की खोज शुरू होती है।
— Ram Sumran Singh
