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GENIUS BOY RAM

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वाह मोदी जी: एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक कविता

वाह मोदी जी: एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक कविता

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वाह मोदी जी, वाह मोदी जी,

खूब जमे हो सत्ता के आगोश में।

कमल तो खिला दिया तुमने,

पर छोड़ दिया देश को संताप में॥

आपकी चाल-ढाल देख लोग हैं दंग,

हुकूमत के नशे ने चढ़ाया कैसा रंग।

हिन्दू-मुस्लिम की आग में रोटियाँ सिकती रहीं,

विदेशी मित्रों की महफ़िलें सजती रहीं।

सत्ता के इस मोह में,

कहीं खो गया देश का होश भी॥

नेहरू पर आरोप लगाते,

विपक्षी को देशद्रोही बतलाते।

अदानी प्रेम की गलियों में,

क्यों भूल गए जन-जन की पीर को?

कमल तो खिला दिया तुमने,

पर छोड़ दिया देश को संताप में॥

राजा भी आप, महाराजा भी आप,

नवाबों के जैसे रायज़ादा भी आप।

मीडिया सजी रही आपकी दुकान में,

पढ़े-लिखे भटक गए पेपर लीक के तूफ़ान में।

कमल तो खिला दिया तुमने,

पर छोड़ दिया देश को संताप में॥

"अमृत काल" के सपने दिखलाते,

"विकसित भारत" के गीत सुनाते।

अच्छे दिन की राह न जाने,

कब से जनता कदम बढ़ाए।

रेल, बैंक और कारखानों पर,

बाज़ारों की छाया है।

जनता पूछे किसके हिस्से,

विकास की यह माया है?

रुपया गिरता, डॉलर हँसता,

आँकड़ों में उत्सव बसता।

महँगाई की मार से झुककर,

आम आदमी चुप-सा रहता।

कमल तो खिला दिया तुमने,

पर छोड़ दिया देश को संताप में॥

इतिहास जब भी प्रश्न करेगा,

जनता का मन साक्ष्य बनेगा।

सिंहासन क्षणभंगुर होता है,

देश सदा रहता प्रताप में।

वाह मोदी जी, वाह मोदी जी,

खूब जमे हो सत्ता के आगोश में।

कमल तो खिला दिया तुमने,

पर छोड़ दिया देश को संताप में॥

कल सत्ता होगी या न होगी,

पर जनता की यादें जीवित होंगी।

नाम नहीं, काम का हिसाब होगा—

जब इतिहास खड़ा होगा इंसाफ़ में॥

वाह मोदी जी, वाह मोदी जी,

कमल तो खिला दिया तुमने,

पर छोड़ दिया देश को संताप में॥

— राम सुमरन सिंह :::


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