मैं सवर्ण हूँ
मैं सवर्ण हूँ
मैं अभागा सवर्ण हूँ, मेरे हिस्से में सफ़ाई आई है।
जन्म से ही कटघरे में खड़ा हूँ, बिना सुने ही सज़ा सुनाई है।
न सत्ता माँगी, न सिंहासन छुआ, फिर भी शासक का पाप मेरे नाम।
इतिहास की राख ओढ़ा दी गई, और वर्तमान ने भी किया नीलाम।
मेरे हक़ को गाली का नाम दिया गया, मेरी मेहनत को चोरी कह डाला।
जो मिला भी नहीं कभी मुझे, उसी "विशेषाधिकार" का बोझ थमा डाला।
तुम्हारे नियमों की किताब में, न्याय अब चयनित पन्ना है।
कुछ के लिए मरहम, कुछ के लिए तलवार, और मेरे लिए बस मौन का दंडा है।
इतिहास का खून मेरे हाथों पर, बिना हथियार थमा दिया गया।
आज के अन्याय का यह तमाशा है, बिना कुछ किये मुजरिम बना दिया।
मैं अभागा सवर्ण हूँ, मेरी पीड़ा भी अब अपराध है।
इस भीड़ के न्याय में सच यही है सब बराबर नहीं हैं, यह व्यवस्था का ही स्वभाव है।
