Varsha Srivastava
Abstract
पहले आती थी
तितलियाँ,
गौरैया,
गिलहरियाँ
बागों में,
अपनी चंचलता से
हृदय पुलकित करने।
किन्तु सम्भवतः
छिप गयीं हैं
अपने घरों में,
क्योंकि
भयभीत हैं
वो भी कि
हवस में
मग्न हुए
मानव रूपी राक्षस
कहीं उनका ही
भक्षण ना कर बैठें।
परित्यक्ता
ठगी हुई औरत
केवल नारी
धरा का विलाप
जल, प्रकृति औ...
सूखी रोटी
प्रेम और तितल...
आज भी।
राक्षस
नाम कमाओ अनुभव हो धन यूँ आजीवन। नाम कमाओ अनुभव हो धन यूँ आजीवन।
जब इंसानियत मरती है, तो वो इंसान भी मर जाता है जब इंसानियत मरती है, तो वो इंसान भी मर जाता है
हक़ीक़त बनते 'ज़ोया' ख़्वाब जो आँखों में हैं पलते। हक़ीक़त बनते 'ज़ोया' ख़्वाब जो आँखों में हैं पलते।
कुछ खिले फूल भी अपनी जगह पर डगमगाने लगे कुछ खिले फूल भी अपनी जगह पर डगमगाने लगे
फाड़ सकता मैं उन लम्हों को जिन्होंने मुझे रुलाया है.. फाड़ सकता मैं उन लम्हों को जिन्होंने मुझे रुलाया है..
नारीत्व की महानता का सम्मान बढ़ाती है। नारीत्व की महानता का सम्मान बढ़ाती है।
अमर हर वो नौजवान होगा जो वतन पर फ़िदा होगा अमर हर वो नौजवान होगा जो वतन पर फ़िदा होगा
हम क्या कहते क्या बोलते क्या सर्च करते हैं । सब पता पर पापियो के पाप पर पर्दे पड़े। हम क्या कहते क्या बोलते क्या सर्च करते हैं । सब पता पर पापियो के पाप पर पर्द...
यहां तो, किसी, साब लोगों को मिलने के लिए ,... हफ्तों पहले से, नाम दर्ज कराना पड़ता है यहां तो, किसी, साब लोगों को मिलने के लिए ,... हफ्तों पहले से, नाम दर्ज करान...
कश्ती को पार लगाना साहिल का इम्तिहान है कश्ती को पार लगाना साहिल का इम्तिहान है
दिल से निकलने वाली रचनाएं खूब होती हैं दिल से निकलने वाली रचनाएं खूब होती हैं
इन आंखों में उन्हें फिर से सजने देते हैं, इन आंखों में उन्हें फिर से सजने देते हैं,
कलम चल लगा के दम चल दर्द लिख. कलम चल लगा के दम चल दर्द लिख.
सहयोग में लगा हुआ जैसे कोई पथप्रदर्शक। सहयोग में लगा हुआ जैसे कोई पथप्रदर्शक।
महफ़िल-ए-ख़्वाहिश फिर रंग जमाने लगी है महफ़िल-ए-ख़्वाहिश फिर रंग जमाने लगी है
इसका विस्तार था धरती से आकाश तक इसका विस्तार था धरती से आकाश तक
वो पास है मेरे पर मुझसे खफा-खफा रहता है वो पास है मेरे पर मुझसे खफा-खफा रहता है
जीवन का भूगोल भी अचानक ही बदल जाता है। जीवन का भूगोल भी अचानक ही बदल जाता है।
सूखे पड़े खेत खलिहान विनती करते हैं किसान सूखे पड़े खेत खलिहान विनती करते हैं किसान
जाते ही आपके लोगों के नकाब उतरने लगे जाते ही आपके लोगों के नकाब उतरने लगे