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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

"राजपूताने की बात निराली"

"राजपूताने की बात निराली"

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अपने राजपूताने की बाते बड़ी निराली है।

यहां पग-पग पर,बाते करती तलवारी है।।


जब मांगी निशानी,सीस दे दियो क्षत्राणी।

राजपूताने में तो हर स्त्री मां शेरावाली है।।


जब आया,बनवीर हाथ मे ले तलवारी है।

उदयसिंह को बचाने पन्ना ने दी कुर्बानी है।।


कौन भूला पन्ना की बात त्याग वाली है।

जिसने हंसते दी पुत्र बलि विकराली है।।


80 घाव लगे,फिर भी रहती युद्ध तैयारी है।

संग्रामसिंह की बाते थी,बड़ी शक्तिशाली है।।


खिलजी,जिसकी नियत थी,चितौड़ पे बिगड़ी।

रतनसिंह को धोखे से बनाया था,उसने बंदी।।


गोरा बादल ने खिलजी तोड़ी अहम डाली है।

छुड़ा लाये,कैद से,बजा दी उसकी ताली है।।


बौखलाकर,उसने चितौड पे बुरी नजर डाली है।

कब्जा किया,चरित्र मे छाई उसके बदहाली है।।


अपना सतीत्व बचाने हेतु मां पद्मिनी ने सजाई।

सखियों के संग सेज अग्नि की सुहागवाली है।।


अपने राजपूताने की बात बड़ी निराली है।

यहां नर,क्या नारी भी बड़ी हिम्मतवाली है।।


हकीम खान सूरी,जो थे,प्रताप की सेना धूरी।

जब तक थी,सांसे,हाथ से न छूटी तलवारी है।।


जयमल,पत्ता,कल्ला राठौड़ दिखाई वो वीरता।

शत्रु की सेना उनके आगे भरने लगी पानी है।।


यहां ऊंटों की सवारी,गोरबंद नखराली है।

राजपूताने की जनता बड़ी भोलीभाली है।।


प्रताप की वीरता की बात ही निराली है।

स्वाभिमान की वो,मिशाल बहुत आली है।।


अपने राजपूताने की बात बडी निराली है।

अभी कहलाता,हिंद वृक्ष राजस्थान डाली है।।


30 मार्च को मनाते है,राजस्थान दिवस,हम।

यहां पर होते,घूमर नृत्य अद्भुत तेरहताली है।।


30 मार्च को हुई,एकीकरण की बात निराली है।

यहां बने 50 जिले,जैसे जयपुर,अजमेर,पाली है।।


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