प्यार कहो या माया
प्यार कहो या माया
प्यार कहो या माया, इसी से बंधा सृष्टि का सार है,
इसके अभाव में तो, यह जीवन हमारा निराधार है।
ग़म की धूप में, तपती है, अगर ये ज़िन्दगी हमारी,
ढूँढो तो, खुशियों की छाँव भी, यहाँ पर बेशुमार है।
अपने आप में ही, ना जाने कितने अर्थ समेटे हुए,
छोटा सा मात्र ढाई अक्षर का शब्द अद्भुत प्यार है।
समस्त शब्द, जहाँ आकर हो जाते हैं, अर्थ रहित,
वहीं से तो प्यार के इस बीज का, होता विस्तार है।
सुमधुर और सुखद एहसास ये, है जो अवर्णनीय,
मानव जीवन की है नींव ये, यही सुख का सार है।
प्यार, ऐसा मौन भाव, जिसे केवल समझा जाता,
कभी आँखों की चमक ये, कभी अश्रु की धार है।
बेजुबान है, निर्विकार है, पर शक्ति से है परिपूर्ण,
कभी बिछड़न है प्यार, तो कभी, एक इंतजार है।
जब तक मानव जीवन, प्यार का न हो सके अंत,
इसकी डोर से ही जुड़ा, हर रिश्ते का, आधार है।
इंद्रधनुष के समान, खूबसूरत हो जाए ये जीवन,
जिसकी भी झोली में प्यार की दौलत बेशुमार है।
अनेक रूप रंग इसके, है जीवन की आधार शिला,
हमारे हर कदम के साथ बहती इसकी ही धार है।
प्यार ना होता इस जग में नफ़रत ही नफ़रत होती,
प्यार है इस जग में विद्यमान तभी तो ये संसार है।
