प्यार है रिश्तों की नींव
प्यार है रिश्तों की नींव
डोर होती है रिश्तों की नाज़ुक,
बड़े प्यार से इन्हें संभाला जाता है,
मुरझाने लगते हैं रिश्ते समय से पहले ही,
गर प्यार से इन रिश्तों को सींचा नहीं जाता है।।
प्यार है आपसी रिश्तों का आधार,
प्यार से फलता फूलता रिश्तों का संसार,
विश्वास अपनापन थोड़ा समझौता थोड़ा झुकाव,
यही रिश्तों की नींव है, यही होता है वास्तव में प्यार।।
रिश्ते होते हैं नाज़ुक काँच समान,
तोड़ देते इन्हें गलतफहमी और गुमान,
रिश्तों में बन जाती जब झूठे प्यार की इमारत,
धीरे-धीरे धुंधला होता चला जाता है रिश्तों का जहान।।
प्यार की नहीं होती है कोई ज़ुबान,
एहसास है ये, है रिश्तों की मीठी सी तान,
कोई रूठे तो मना लो प्यार से गुत्थी सुलझा लो,
रिश्तों को मजबूत करे आपसी तालमेल और सम्मान।।
जहाँ प्यार है वहीं होती है अनबन,
प्यार से बनते रिश्ते, रिश्तों से है जीवन,
एक दूसरे को वक़्त देना, बातें करना, है ज़रूरी,
वरना रिश्तों से बढ़ जाती दूरियाँ, होने लगती है तपन।।
प्यार बिगड़े रिश्तों को है बनाती,
गहरे से गहरे ज़ख्मों को भी ये भर देती,
मरहम है प्यार रिश्तों में, है यह संजीवनी सम,
सच्चे प्यार की पुकार ऐसी जाते हुए को भी रोक लेती।।
एक दूजे पे करना सदा विश्वास,
यही तो होता, प्यार का सच्चा एहसास,
प्यार और विश्वास के इत्र से, महके जब रिश्ता,
तो समझो दुनिया में इससे बड़ी नहीं कोई दौलत खास।।
