STORYMIRROR

J P Raghuwanshi

Inspirational

3  

J P Raghuwanshi

Inspirational

"पुरुषार्थ"

"पुरुषार्थ"

1 min
402


जाग मानव, कब तक सोयेगा,

कब तक अपने, भाग्य पर रोयेगा।

ब्रम्हा से लिखवा कर,

हम नहीं आयें।


जो कुछ भी है पास,

निज भुज बल से पायें।

कठिन कर्म से,

दुविधा की बेड़ियां करती है।


करें प्रयत्न तो,

परेशानियां हटती है।

क्या लाया था, जो तू खोयेगा,

कल वो ही पायेगा, आज जो बोयेगा।


जाग मानव, कब तक सोयेगा,

कब तक अपने, भाग्य पर रोयेगा।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational