STORYMIRROR

Rajit ram Ranjan

Abstract

4  

Rajit ram Ranjan

Abstract

पत्थर की इस दुनिया में !

पत्थर की इस दुनिया में !

1 min
302

किसे मनाने चले हो तुम 

कौन तुम्हारा यहां अपना हैं 

झूठे रिश्ते भी बनाते हैं लोग 

यहां अपना काम निकालने के लिए 

तुम्हें यक़ीन नहीं होगा 


ये सुनकर कि 

ये जीवन भी एक झूठा सपना हैं 

किसे मनाने चले हो तुम 

कौन तुम्हारा यहां अपना हैं 

पत्थर कि इस दुनिया में 


पत्थर जैसे लोग हो गये 

इंसान कोई दिखता नहीं 

पता नहीं सब कहाँ खो गये

मयाबी इस संसार में 

सबको अच्छा दिखना हैं 

किसे मनाने चले हो तुम 

कौन तुम्हारा यहां अपना हैं !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract