Krishna Sinha
Abstract
अहं की धूल ना यूँ,
रिश्तों के आईनों पर जमने दो,
साफ से अक्स भी
आँखों को धूमिल फिर दिखने लगे ...
अपनत्व के छींटों से पोंछ दो गर्द ये,
हर चेहरे स्पष्ट से फिर दिखने लगेंगे.....
वो नन्ही पीड़...
हुनर
मेरे लिए खास
राष्ट्र की खा...
तमाशा
हम रेगिस्तान ...
अक्स
राज
यूँ ही
नन्ही गौरिया
तो अंदर छुपी हुई. मैं ही नहीं मिलती कभी ! तो अंदर छुपी हुई. मैं ही नहीं मिलती कभी !
मैं हूँ छोटी सी कली, बस थोड़ा प्यार चाहती हूँ! मैं हूँ छोटी सी कली, बस थोड़ा प्यार चाहती हूँ!
इस तरह चेहरे के आपके सरमाएदार हैं ये। इस तरह चेहरे के आपके सरमाएदार हैं ये।
अपनी कूंची के रंगों से रंग दो धरती को फिर एक बार ओ चित्रकार ओ चित्रकार। अपनी कूंची के रंगों से रंग दो धरती को फिर एक बार ओ चित्रकार ओ चित्रकार।
भूरी, मटमैली प्यारी छोटी गौरैया, मेरे बचपन की नटखट छोटी चिरैया। भूरी, मटमैली प्यारी छोटी गौरैया, मेरे बचपन की नटखट छोटी चिरैया।
के गले लगाना जी उठेंगे हम तेरे अधुरे इश्क में भी पूरा जी लेंगे हम। के गले लगाना जी उठेंगे हम तेरे अधुरे इश्क में भी पूरा जी लेंगे हम।
किसी न किसी को अपनी महक से लुभा रही है। किसी न किसी को अपनी महक से लुभा रही है।
चाह नहीं रही अब तुम्हें पाने की इसीलिए जुदाई में मस्ती से जी लेता हूं। चाह नहीं रही अब तुम्हें पाने की इसीलिए जुदाई में मस्ती से जी लेता हूं।
नियम कानून भी सामने वाले की हैसियत देख कर। नियम कानून भी सामने वाले की हैसियत देख कर।
बातां तो घणी केवणे है, पर में जाणा जमानो सुधर जावे ? बातां तो घणी केवणे है, पर में जाणा जमानो सुधर जावे ?
उम्मीद है दस में से दस ना सही, मिल जाएं एडिटोरियल स्कोर सात। उम्मीद है दस में से दस ना सही, मिल जाएं एडिटोरियल स्कोर सात।
गुरु ने मेरे अस्तित्व को, सार्थक बनाया है। गुरु ने मेरे अस्तित्व को, सार्थक बनाया है।
ज्ञान पूंज मेरे मन से गुजरी, दिन के पहले पहर तुम हो ज्ञान पूंज मेरे मन से गुजरी, दिन के पहले पहर तुम हो
गर्म पानी पियो स्वस्थ भोजन करो घर में एक दूजे की मदद किया करो ना। गर्म पानी पियो स्वस्थ भोजन करो घर में एक दूजे की मदद किया करो ना।
कशमकश का किसी को बता नहीं पाना क्या वो इत्तफाक था। कशमकश का किसी को बता नहीं पाना क्या वो इत्तफाक था।
छोड़ करके वेदना के स्वर नव प्राण का सृजन कर, ग्रस रहा आत्म दीपक को अंधकार तू इसका दमन कर। छोड़ करके वेदना के स्वर नव प्राण का सृजन कर, ग्रस रहा आत्म दीपक को अंधकार तू ...
अत्याचारों के ख़िलाफ़ लड़ती नारी मन की आवाज़ हूँ मैं अत्याचारों के ख़िलाफ़ लड़ती नारी मन की आवाज़ हूँ मैं
कहे मुसाफिर बनो आत्मनिर्भर नहीं को साथी तुम्हारा यहाँ पर। कहे मुसाफिर बनो आत्मनिर्भर नहीं को साथी तुम्हारा यहाँ पर।
छोटे सा किरदार भले हो उसे अपनी कला दिखाने दो। छोटे सा किरदार भले हो उसे अपनी कला दिखाने दो।
शीतल पवन भी छेड़े मुझको उड़ा उड़ाकर आँचल मेरा!! हरियाली चूड़ी भी देखो कैसे शोर मचाती है! शीतल पवन भी छेड़े मुझको उड़ा उड़ाकर आँचल मेरा!! हरियाली चूड़ी भी देखो कैसे शोर मच...