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Rajeshwar Mandal

Classics

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Rajeshwar Mandal

Classics

परमानंद

परमानंद

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ताड़ गाछ के नीचे 

ताड़ पत्तों से बनी झोपड़ी 

ताड़ पत्तों से बनी चटाई 

ताड़ पत्तों से बना दोना

तड़कून मिश्रित नमकीन 

वहां बिकते ताड़ी

गरीबी से ताड़ ताड़ लोग 

होने तरोताजा 

जमघट लगाए वहां 


थका हारा

नहीं आवारा 

परंतु घर से बेचारा

मजबूरी

कुछ पल के लिए

अपनों से दूरी 

होने शिथिल 

आनंद 

अतुल आनंद

आनंद ही आनंद

परमानंद


जैसे जैसे

मस्तिष्क निष्क्रिय 

दिल और जुवान सक्रिय 

बिना वज़ह बेमतलब 

हो रसीले शुरू चुटकुले 

हल्की फुल्की नोंक झोंक 

गाली गलौज 

फिर वही

जिसका डर

मुंह लटकाए

सीधे घर


लड़खड़ाते बलखाते

श्रीमती से नज़र बचाते

बिना खाए औंधे मुंह 

गिरे विस्तर 


अगले सुबह मुड फ्रेश

कंधे कुदाल छेनी हथौड़ी

बांध गमछा सतू मुढ़ी 

दिन भर काम

बच्चों की शिक्षा 

जय श्री राम 

आज की शाम

फिर वही प्रोग्राम।


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