प्रकृति का संगीत
प्रकृति का संगीत
सुन सखी री !
पवन सुना रही,
गीत अनोखा ।
झरनों ने इसमें,
दिया संगीत ।
नदिया ने लहराकर,
घोल दी मिश्री ।
फूलों और नव पल्लवों ने,
खुशबू देकर गजब की
महकाया इसको ।
सुन सखी री !
प्रकृति का देख रूप यह अद्भुत,
पंछियों ने कलरव करके,
रंग घोले इसमें सुरीले ।
चल सखी री !
कुछ बतियाएँ, मुस्कुराएँ और
समय बिताएँ प्रकृति के इस,
अनुपम रूप के संग ।
