STORYMIRROR

Praviksha Dubey

Inspirational Others

4  

Praviksha Dubey

Inspirational Others

प्रकृति का नवसृजन

प्रकृति का नवसृजन

1 min
233

घटित कारक होते हैं 

रहतीं हैं गतिशील क्रियायें

आत्मनेपदी 

या 

परस्मैपदी के 

कई लकारों में

जीवन का रूप कुछ इस तरह चलता है


होता है प्रत्यय से 

प्रकृति का नवसृजन

उपसर्ग के लगने पर

बदल जाता है अर्थ

जीवन का नियम कुछ इस चलता है


संहिता से निर्मित हुयी 

सन्धि के समान 

रहता है एकीभाव में

अथवा

परिस्थितियों के अनुसार 

ढल जाता है विच्छेद स्वरूप में

जीवन का व्याकरण कुछ इस तरह चलता है


धीरे-धीरे समास होकर 

ले लेता है 

संक्षिप्तीकरण का रूप

जीवन का नियमन सूत्र कुछ इस तरह चलता है


पद्यों में निबद्ध 

वय का सार रूप

गद्यमयी लेखन सा

धारण कर विस्तृत स्वरूप

जीवन का साहित्य कुछ इस तरह चलता है


विस्मयबोध अहो

हे, अरे, का सम्बोधन

कर्तृत्व का होता भान

एक शब्द के अर्थ अनेक

जीवन का वाक्य विन्यास कुछ इस तरह चलता है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational