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SIJI GOPAL

Drama

3  

SIJI GOPAL

Drama

प्रकृति हूँ मैं

प्रकृति हूँ मैं

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ईश्वर की कृति हूँ मैं;

स्वर्ग की आवृति हूँ मैं;

जीवनचक्र की सच्ची कहानी कह रहीं हूँ‌ मैं..

प्रकृति हूँ मैं, हाँ प्रकृति हूँ मैं !


प्रेम की आकृति हूँ मैं;

धरनी की संस्कृति हूँ मैं;

ममता की मूरत बन सब कुछ सह रही हूँ मैं..

प्रकृति हूँ मैं, हाँ प्रकृति हूँ मैं !


गुमनाम की स्मृति हूँ मैं;

विनाश‌ की विकृति हूँ मैं;

प्रलय का रूप में स्वयं ही दह रहीं हूँ मैं..

प्रकृति हूँ मैं, हाँ प्रकृति हूँ मैं !


बदलाव की स्वीकृति हूँ मैं;

सौन्दर्य की आंलकृति हूँ मैं;

हर रूप में नया स्वरूप‌ लेकर बह रही हूँ मैं..

प्रकृति हूँ मैं, हाँ प्रकृति हूँ मैं !


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