STORYMIRROR

Dr.Rashmi Khare"neer"

Abstract

3  

Dr.Rashmi Khare"neer"

Abstract

प्रिय

प्रिय

1 min
253

बांध लो मुझे अपने से

दूर ना हो जाऊँ कहीं

प्रिय तुम्हारे मन में बसी हुई हूं

इतना तुम निभा जाओ


व्याकुलता से भरे ये नयन

जो तुम मुझे नहीं दिखते

लगन है ये तुमसे

बांध लो मुझे अपने से।

मेरे खेवानहर बन जाओ

मेरी पतवार

दूर कहीं ले जावों

झिलमिलाती पानी। की बूंदे

मेरी आंखो मै डाल दो

ऐ नीर बंध जा फिर एक बार

दूर ना हो जाए कहीं



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract