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Amar Singh

Romance

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Amar Singh

Romance

प्रेम

प्रेम

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मूक होकर भी बहुत कुछ बोलता है।

बिन कहे ही भेद सारे खोलता है।

नेत्रों में स्वप्निल सवेरा, 

प्रेम सभी के घोलता है।



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