STORYMIRROR

राजेश "बनारसी बाबू"

Abstract Others

4  

राजेश "बनारसी बाबू"

Abstract Others

प्रेम

प्रेम

1 min
283

मेरा प्रेम निःस्वार्थ है प्रिये,

प्रेम मोहताज नहीं दो चुटकी सिंदूर का प्रिये।

प्रेम तो बस प्रेम खोजता है,

प्रेम तो बस सम्मान चाहता है,

प्रेम नहीं होता सात फेरो से प्रिये।

प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं होता ,

प्रेम न रंग देखता ना रूप देखता है,

प्रेम न उम्र देखता हैं प्रेम न जाति देखता है।

प्रेम न संपत्ति देखता है,

प्रेम जरूरी नहीं शब्दों में बयां हो।

प्रेम हो तो बस आँखों से बयां हो जाता है।

प्रेम दो दिलों को ही नहीं परिवार जोड़ता है,

प्रेम विपदा परेशानियों में भी साथ होता है।

प्रेम ही तो दुनिया से लड़ जाता है,

प्रेम वासना नहीं खोजता है।

प्रेम अगर न हों तो महफिल वीरान लगे है,

प्रेम तो एक दूजे का ख्याल रखता है प्रिये।

प्रेम एक दूजे का दर्द बाट लेता प्रिये,

प्रेम एक दूजे से कभी भी दहेज न मांगता है प्रिये,

प्रेम हो तो हर पल खुशी से महके आँगन,

प्रेम किसी परीक्षा का मोहताज नहीं होता।

प्रेम एक दूजे का आंसू पहचानता है।

प्रेम दर्द में हो तो एक दूजे का हाथ थामता है।

प्रेम लोगों में समर्पण भी मांगता है।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract