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Dheeraj kumar shukla darsh

Romance

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Dheeraj kumar shukla darsh

Romance

प्रेम प्रेयसी

प्रेम प्रेयसी

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हाँ बना लूंगा तुम्हें

प्रेयसी अपनी

रहूँगा बनकर सदा

प्रेमी मैं तुम्हारा

लिख दूँगा नाम

तुम्हारे हृदय पर

बना लूंगा तुम्हें अपना

और तुम्हारी अंतरात्मा में

समा लूंगा खुद को

जब अंत होगा जीवन का

तो दोनों मिलकर

एक ही रहेंगे सदा

हमारा प्रेम होगा

सबसे जुदा

तुम परिणीता नहीं

बनकर प्रेयसी 

रहोगी मेरी

और दोनों मिलकर हम

शिव हो जायेंगे।


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