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Dheeraj kumar shukla darsh

Others

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Dheeraj kumar shukla darsh

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हरी घास पर ओस की बूंदें

हरी घास पर ओस की बूंदें

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हरी घास पर ओस की बूंदें

लगती जैसे जगमग मोती

प्रकृति में बिखर गये हों

जैसे मालाओं के मोती

अद्भुत लगता देख इन्हें तब

धूप सुनहरी इन पर गिरती

सात रंग से सज जाती तब

सुंदर लगती अपनी धरती

चिड़िया आती इनको चुगती

लगती राजहंस के जैसी

सुबह सुबह भ्रमण करने से

बढ़ जाती ऑंखों की ज्योति

धरा पर ओस की बूंदें लगती

जैसे हो‌ सागर में मोती

सुंदर मनमोहक बन जाती

प्रकृति जब इनसे सजती

प्रकृति जब इनसे सजती



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