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Bhawna Kukreti Pandey

Abstract

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Bhawna Kukreti Pandey

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प्रेम की बात!

प्रेम की बात!

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अकस्मात ही

जब हिंसक जीव ,

करने लगे प्रेम की बात,

हृदय चेत जाना,

संभव है वो क्षीण हो चला हो,

उसका पैंतरा बदलने लगा हो।


याद रखना

वो छल का राजा है,

उसे सब समझ आता है,

कब कहाँ मन कैसे

कितना घटता बढ़ता है।


आखेट के उसके अनेकानेक अनुभव,

मौन में भी शिकार फ़साना जानते हैं।

वो तेरा मेरा सबका मर्म छूना जानते हैं।


वो कभी रूखा नहीं हो सकता है,

वो कभी भूखा नहीं सो सकता है।



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