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Aapki Kavyatri

Abstract

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Aapki Kavyatri

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निगाहें

निगाहें

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तुम्हारा यूँ सुर में भारी निगाहों से मुझे देखना

तुम्हारे इत्र की महक उसका

मुझे यू पागल केर जाना


तुम्हारा यूँ आईने में देखकर जुल्फों को झटककर

बारिश की बूंदों को आजद करना


मेरे इतवार को महका देता है ओर साथ ही साथ

मेरे हार्ट अटेक चान्सेस को बढ़ाता है।


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