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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Abstract

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

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वफादार जानवर

वफादार जानवर

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तेरी वफादारी बेमिसाल है

स्वामिभक्ति क्या कमाल है

सजग प्रहरी सा रखवाला

तू इकलौता नमकहलाल है

संतोषी इतना कि इंतजार करे

मालिक के भोजन तक सब्र धरे

जितना मिल जाये उसमें खुश

ज्यादा के लिये ना बवाल करे

तेरी ध्राण शक्ति बड़ी कमाल है

सूंघने से हल करता हर सवाल है

मालिक के आगे दुम हिलाता है

दुम दबाकर भागने में कमाल है।



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