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Surendra kumar singh

Abstract

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Surendra kumar singh

Abstract

प्रेम है,जीवन है

प्रेम है,जीवन है

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जीवन है प्रेम है

आस्था है, विश्वास है

त्याग है, समर्पण है

सुख, है, दुख है

हार है, जीत है

रुदन है, मुस्कराहट है।

जीवन है तो समय है

चांद है, सितारे है

समुंदर है, नदियां हैं

वृक्ष है परिंदे है

आंधियां है तूफान है

भंवर है, लहरे हैं

जीवन है तो दिन है

और दिन का हर पन्ना

एक किताब है

हर पल एक सदी है

हर सदी के अपने अपने राग है

जीवन है तो ब्रह्मांड है।

पूरा अस्तित्व ही जी रहा है

जीवन के साथ।


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