STORYMIRROR

Om Prakash Fulara

Abstract

2  

Om Prakash Fulara

Abstract

प्रभात बेला

प्रभात बेला

1 min
559

जाओ जाग लाल अब मेरे 

 पूरब में सजती है लोई।


भोर सुहानी छटा बिखेरे,

सरपट भागी रजनी सोई।


खगकुल ने है राग सुनाया,

जन जन हिय उल्लास है छाया।

 

नव कुसुमन ने धरा सजाई,

स्वर्ग उतर धरती पर आया।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract