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Om Prakash Fulara

Abstract

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Om Prakash Fulara

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प्रभात बेला

प्रभात बेला

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जाओ जाग लाल अब मेरे 

 पूरब में सजती है लोई।


भोर सुहानी छटा बिखेरे,

सरपट भागी रजनी सोई।


खगकुल ने है राग सुनाया,

जन जन हिय उल्लास है छाया।

 

नव कुसुमन ने धरा सजाई,

स्वर्ग उतर धरती पर आया।


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