anuradha nazeer
Classics
यदि आपको उच्च रक्तचाप है
अपने प्रिय से ही बात करें
यदि आपको अपनी पत्नी के साथ
केवल निम्न रक्तचाप की बात है
तब आपको साम्यावस्था प्राप्त होगी।
कोई
इन चीजों को र...
ज़िन्दगी का क...
प्यार दो
मूल्यवान
जीत
अपने काम से प...
सफलता
प्यार प्यार प...
प्यार की प्या...
बाबुल ने विदा कर के बेगाना कर दिया, पिया ने उम्र भर ये एहसास दिलाया कि ये उसका घर है... बाबुल ने विदा कर के बेगाना कर दिया, पिया ने उम्र भर ये एहसास दिलाया कि ये उसका...
पुरुषोत्तम श्रीक्षेत्र के श्रीजगन्नाथ हैं उत्कलीयों के जीवंत ठाकुर, जीर्णवेर परित्याग जीर्णोद्धार... पुरुषोत्तम श्रीक्षेत्र के श्रीजगन्नाथ हैं उत्कलीयों के जीवंत ठाकुर, जीर्णवेर ...
विपदा की इस विषम घड़ी में पड़ी अकेली रानी करती विलाप बेसुध सी हो गई थीं तारा रानी किसी तरह से ला... विपदा की इस विषम घड़ी में पड़ी अकेली रानी करती विलाप बेसुध सी हो गई थीं तारा रा...
तस्वीर हमें याद दिलाती है, कुछ मीठी और कुछ खट्टी यादें... तस्वीर हमें याद दिलाती है, कुछ मीठी और कुछ खट्टी यादें...
अक्सर मैं....सवालों मे छुपे..... उत्तर ढूंढते रहती हूँ अक्सर मैं....खामोश जुबाँ वालो के.....म... अक्सर मैं....सवालों मे छुपे..... उत्तर ढूंढते रहती हूँ अक्सर मैं....खामोश जुबाँ...
A poem about changing the centres A poem about changing the centres
प्रथम दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप को समर्पित है। प्रथम दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप को समर्पित है।
सब लोग शतरंज हैं जानते फिर भी दांव पेच से बाज नहीं आते यहाँ। सब लोग शतरंज हैं जानते फिर भी दांव पेच से बाज नहीं आते यहाँ।
यादेँ यादेँ
एक बार गाँव चलते हैं ,बरगद की छांव और मिटटी की सोंधी महक को महसूस करते हैं एक बार गाँव चलते हैं ,बरगद की छांव और मिटटी की सोंधी महक को महसूस करते हैं
मेरे अहसासों को सिर्फ़, अल्फ़ाज़ समझना तुम... मेरे अहसासों को सिर्फ़, अल्फ़ाज़ समझना तुम...
जब चलते थे तो उन्हें मैंने सीना ताने चलते देखा है... जब चलते थे तो उन्हें मैंने सीना ताने चलते देखा है...
खुशियां बिखेर दें औरों के आँगन में भी साथ मिलकर मैं और तू। खुशियां बिखेर दें औरों के आँगन में भी साथ मिलकर मैं और तू।
अपनी समर्पण से साकार कर उसे हकीकत अपना बनाऊँगा। उसे मैं अपना बनाऊँगा।। अपनी समर्पण से साकार कर उसे हकीकत अपना बनाऊँगा। उसे मैं अपना बनाऊँगा।।
बगिया को चहकाना है, माँ के घर जाना है। बगिया को चहकाना है, माँ के घर जाना है।
हर चीज है कठपुतली, वक्त के हाथ नाच रही... हर चीज है कठपुतली, वक्त के हाथ नाच रही...
लोग चले जाते हैं रह जाते हैं पन्ने... लोग चले जाते हैं रह जाते हैं पन्ने...
बहुत कम हैं जिंदगी और मौत का फासला ! बहुत कम हैं जिंदगी और मौत का फासला !
यही तो इस अद्भुत पल की विशेषता है कि हर सितारा आतुर है उसकी सराहना करने को _ _ _ यही तो इस अद्भुत पल की विशेषता है कि हर सितारा आतुर है उसकी सराहना करने को _ _ ...
भरे के पास होता खाली खजाना हूं खजाने में न जाने मैं क्यौं उलझा हूं। भरे के पास होता खाली खजाना हूं खजाने में न जाने मैं क्यौं उलझा हूं।