STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Abstract Inspirational

4  

V. Aaradhyaa

Abstract Inspirational

पंचतत्व से बना जीव मात्र है

पंचतत्व से बना जीव मात्र है

1 min
351


बहुत कीमती है ईमानदारी ये सच जान ले।

पंच तत्वों में बची हुई सबकी यहाँ श्वास है।।


अपनों का साथ रहे, जिन पर विश्वास है।

यह बदलते समय का मात्र इक आभास है।।


आज वाग्जालों से जिन्हें लोग यूँ बहला रहे।

अब उन्हें भी सच्चाई का पूर्णतः अभ्यास है।।


कौन साथ होगा जाने किसको क्या पता ।

ढूंढ लें अपनों को जो रहते आपके पास है।।


किस्मत यदि साथ में किसी के होगी ही नहीं।

व्यर्थ सा ही तब जीवन का हर एक रास है।।


यथासंभव आनंद लें ले, जीवन क्षणिक है ।

कभी जीवन में सुख है तो कभी संत्रास है।।


ज़ब समय मिले तभी प्रभु का सुमिरन कर लें ।

प्रभु की कृपा और दया ही भक्तों का प्रन्यास है।।




Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract