STORYMIRROR

पकेटमार

पकेटमार

1 min
423


आज में बेहद खुश था

क्युंकि मेंने तिरगां उडाया ।

लेकिन में चौंक गया,

जब आपने जेब में हात घुसाया !

क्या क्या जो मेरा चोरी हुआ था,

जब जब उनका हिसाब लगाया !!


यहाँ तो कहिं पे लिखा नहिं था,

"पकेटमार के लिये सावधान"

तो फिर कौन था वौ जिसने यहाँ लुट मचाया !!


यहाँ तो सब हें देशभक्त,

राष्ट्र-वन्दना में बिभोर

तो फिर वौ कौन था,

जिसने किया, ये पकेटमार !!


ऐ लोगों, अभि तो थोडा होस में आओ

थोडा सा अपने जेब में हात घुसाओ ।

कोइ काट लिया होगा तुम्हारा घना जंगल

कोइ काट लिया होगा तुम्हारा इज्जत,

छुपाके एक ब्लेड आपने जेब के अन्दर

वह भि तो गा सकता हे,

ये राष्ट्रीय गान !!


अभि भि तो प्यारा तीरगां के निचे सुनाइ दे रहा है,

कितना सारा स्लोगान ।

उसमें हो सके तो जोड दो और एक स्लोगान, पकेटमार......सावधान, सावधान !!!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from pusparani Patel

Similar hindi poem from Drama