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Madan lal Rana

Inspirational

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Madan lal Rana

Inspirational

पिता

पिता

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पिता और परम पिता परमेश्वर में

कुछ ज्यादा फर्क नहीं होता है,

बस एक लौकिक और एक

पारलौकिक होता है.

पालक तो दोनों हैं इस जहां में मगर,

एक प्रत्यक्ष और एक 

अप्रत्यक्ष(परोक्ष) होता है.

जागते तो दोनों रात-रात भर शिशू के लिए,

पर एक प्रकट और एक

अदृश्य होता है.

शैशवावस्था से लेकर

किशोरावस्था तक,

करते हैं निगरानी पिता पुत्र की

कुछ इस हद तक.

 कि.....

ठोकर भी लग जाए अगर कहीं लाडले को,

तो गिरने नहीं देेेते जमीं पर.

थाम लेते हैं जिगर के टुकड़े को,

चोट खा लेते हैं अपने सीने पर.

यूं ही सिलसिला चलता रहता है,

खुद को जोखिम में डालकर.

मर-मर भी जी उठता है,

एक पिता अपने पुुुुत्र को काबिल बनाकर.



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