पिता - बेटी का पहला प्यार
पिता - बेटी का पहला प्यार
पापा आपसे कुछ कहना है ...
जब छोटी थी सुना बड़ी प्यारी और शरारती थी
नन्ही से आंखे , नन्हे से हाथ
बहुत प्यार लुटा थे आप ।
गोद में लेना , झुले में झुलाना मुझसे बातें करना, मुझे हँसाना
मेरा बिस्तर को गीला करना या रातों का रोना
मैंने तो छीना आपका सोना ।
मेरी खुशी के लिए कभी घोड़ा तो कभी हाथी ।
कभी हवा मैं उछालते तो कभी करतब दिखाते ।
जब रूठ जाऊं तो झट से मनाते ।
कभी टॉफी देखर या आइसक्रीम लाते ।
पापा आपने हमेशा मेरे हर जरूरत को किया पुरा
मै कभी ज़िद या फरमाइश करती तो उससे अनसुना करके भी सुना है ।
उंगली पकड़कर तो चलना आपने सिखाया ।
गिरी मै और लगा भी फिर भी अपने मुझे सरहाया
अपना जन्मदिन भूल जाते पर मेरा जन्मदिन महीनें पहले याद आता ।
नए कपड़े, सब चीज नयी पर आपने अपने लिये कुछ किया ही नहीं
बताऊं क्या है यह सही ??
पता है मुझे आंख भर भी आती तो आप छटकाएंगे नही ।
अपने हाथो से खिलाया आपने , मुझे जो पसंद था हमेशा दिलाया आप ने
आम जो आप छोड़ते उसमें आपका भी दिल था ।
पर मेरी बेटी बड़े प्यार से खाये आपको सुकून मिलता ।
आपके लाड़ली हूं ना मै ..
मां कहती है पापा ने तुझे सर पर चढ़ाया है
पर आपने ने मुझे तो अपने सपनों को बढ़ावा दिलाया है
आप जब भी पास होते है तो एक अच्छा एहसास होता है ।
ना दिल घबराता है ना रोना अता है ।
आपकी दाट ,आपके फटकार भी याद आती है ।
पर आपका प्यार इनपर नकाब डाल देता है
आज भी याद आता है वह दिन
साथ में खेला करते , आप चुपके से डराया करते
फिर केहते तू मेरी बेटी है तुझे डरना नहीं है ।
तुझे आगे हर बुराई से लड़ना है
खामोश ना रहना तू कभी..
बेटी है तू मेरी ।
कहते है बेटी पराया धन है
पर क्यों कहता है आपका मन ये
यह सोचकर कभी नाराज़ मत होना
एक दिन तो मुझे आपसे दुर जाना ही होगा ।
पिता - बेटी का पहला प्यार जो है ।
आपसे वादा करती हूं हमेशा रखुंगी आपकी लाज़
ज़रूर होगा आपको मुझ पर नाज़ ।
आप कहते है ना मेरी बेटी मेरा ताज़ है ।
आंखे भर आयी होगी पर हमारा रिश्ता ही कुछ ऐसा है
अनोखा सा ..
आपकी प्यारी बेटी ..
