पीले पत्ते
पीले पत्ते
न चाहते हुए भी
करते हैं इंतजार
कभी देखते हैं
दीवार पर टंगी घड़ी
और कभी खोल लेते हैं मोबाइल की स्क्रीन
डालते हैं
सरसरी एक निगाह
मैसेज की लिस्ट पर
झांक लेते हैं मेल बॉक्स में
जिसमें कभी कभी ही
मेल होती है काम की
फिर फोन की कॉल लिस्ट को
लेते हैं ऐसे खंगाल
कि कोई नज़र आ जाए मिस्ड कॉल
क्योंकि हो गए हैं
सबके रहते हुए भी अकेले
और सर्च कर रहे हैं वो मैसेज,
वो मेल,
वो फोन नंबर
जिस से कर सकें
दिल की दो बातें
उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचते _पहुंचते रह गए हैं
जो नाम वो भी गिनेचुने
जैसे पतझड़ आने पर
डाल पर रह जाते हैं कुछ ही पत्ते
वो भी पीले...
