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Ritu Purohit

Abstract Others

4.5  

Ritu Purohit

Abstract Others

ढूंढ रहा मैं

ढूंढ रहा मैं

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ढूंढ रहा मैं,खुद को चुपके चुपके 

जान रहा मैं खुद को धीरे धीरे 

खुद से खुद का मिलना 

कब हो पाएगा?

जान पहचान का सिलसिला

 क्या लंबा चल जाएगा?

मन का परिंदा कितने पंख फड़फड़ाएगा

 दूर है,जाना उसको 

क्या वो पहुंच पाएगा

राह में जब वो थकेगा 

पनाह कहाँ वो पाएगा

मंज़िल पर जब  पहुंचेगा 

कितना सुकून वो पाएगा

और न पहुंचा तो,

 क्या खुद को 

पहचान वो पाएगा?

ढूंढ रहा मैं,खुद को चुपके चुपके

 जान रहा मैं खुद को धीरे धीरे


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